नीलम से ज़िंदगी हो गयी है मेरी
जो किसी को सूट ही नहीं करता | |
दो अल्फ़ाज़ क्या कह दिए मैंने
वो बेगाने हो गए ||
हम दोनों ही अनजाने थे
मगर एक नज़र देखते ही
सदियों की पहचान निकल आयी ||
उनका आना ना हुआ
हमारा बुलाना ना हुआ
फासला इतना की
दोनों से मिटाना ना हुआ ||
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