Wednesday, 4 April 2018

जाने क्यूँ आजकल


Love Glitter, Scraps, Graphics and comments
   जाने क्यूँ आजकल, तुम्हारी कमी अखरती जा रही है 
   यादों के बन्द कमरे में, ज़िन्दगी सरकती जा रही  है ||

    पनपने नहीं देता कभी, बेदर्द सी उस ख़्वाहिश को
    महसूस तुम्हें जो करने की, एक कोशिश होती जा         रही है ||


    दावे करती हैं ज़िन्दगी, जो हर दिन तुझे भुलाने की ,
      एक नाकाम सी कोशिश होती जा रही है ||

    आहट से भी चौंक जाए, , 
   मालूम नहीं क्यों ज़िन्दगी, 

    मुस्कराने से भी डरती है ||

    मगर एक न एक दिन पाउँगा जरूर तुझको 
    इस खवाहिश की कोशिश होती जा रही है || 

Love Glitter, Scraps, Graphics and comments